BHOJPURI

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
40. दुपहरी खरुआइल देखनी
गाँवन में फटहाली देखनी
नगरन में बदहाली देखनी
मेहनतकश लोगन के हाथे
खाली खाली थाली देखनी I

ठंढा चूल्हा चिसत देखनी
पैर बिवाई रिसत देखनी
मालिक लोगन के सेवा में
कइ गो एँड़ी घिसत देखनी I

अरमानन के जरत देखनी
हरिश्चंद के सरत देखनी
परवत जइसन दरद लेले
बाबूजी के मरत देखनी I

त्योहारन के रोवत देखनी
बीज फूट के बोवत देखनी
घोड़ा बेंच के साहूकार के
खर्राटा संग सोवत देखनी I

फूलन के मरुआइल देखनी
शूलन के अगराइल देखनी
अगहन पूस महीना में भी
दुपहरी खरुआइल देखनी I 

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com

39. हमरा प्यार हो गइल  

हमरा रोग एगो बड़ी बरियार हो गइल
प्यार हो गइल हमरा प्यार हो गइल I

तीख नयनन के बान से बेधाइल जिया
हमार जियरा बेचारा शिकार हो गइल I

केकरो रूप के नसा आँख में आ बसल
हमरा अँखिया से निंदिया फरार हो गइल I

कवनों पुरवा निगोड़ी के पा के छुवन
दर्द दिल के समुन्दर में ज्वार हो गइल I

हमार अरमान बा रोग निकहा बढ़े
अब त जिए के इहे आधार हो गइल I


डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com

38. दुपहरी खरुआइल देखनी

गाँवन में फटहाली देखनी
नगरन में बदहाली देखनी
मेहनतकश लोगन के हाथे
खाली खाली थाली देखनी I

ठंढा चूल्हा चिसत देखनी
पैर बिवाई रिसत देखनी
मालिक लोगन के सेवा में
कइ गो एँड़ी घिसत देखनी I

अरमानन के जरत देखनी
हरिश्चंद के सरत देखनी
परवत जइसन दरद लेले
बाबूजी के मरत देखनी I

त्योहारन के रोवत देखनी
बीज फूट के बोवत देखनी
घोड़ा बेंच के साहूकार के
खर्राटा संग सोवत देखनी I

फूलन के मरुआइल देखनी
शूलन के अगराइल देखनी
अगहन पूस महीना में भी
दुपहरी खरुआइल देखनी I 

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com

37. प्यार में तोहरा पागल जिया हो गइल

प्यार में तोहरा पागल जिया हो गइल
मोर निंदिया उड़ल चिड़िया हो गइल I

हमरा खाए नहाए के सुध ना रहल
ई सरिरिया सुखल छड़िया हो गइल I

दढ़िया बढ़ल केसवा अझुरा गइल
हमार दिलवा जरत बीड़िया हो गइल I

केहू पागल दीवाना काकादो कहल
केहू कहल कि ई बढ़िया हो गइल I

हमरा पंजरा कहेके त बहुत कुछ रहे
बाकि मिलनी त जीभ बुढ़िया हो गइल I


डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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36. पतझड़ भइल अनंत

रमकलिया के गाँव से
रूठ गइल मधुमास I

कोकिल से कंत बसंत रूठल
थापन से मिरदंग
कलियन से अंगड़ाई रूठल
फागुन भइल बेरंग I

परबतिया के पाँव से
लूट गइल अनुप्रास II

हरिया से होरी रूठल
हल्कू से सब खेत
छठिया से चूड़ी रूठल
बुधिया मर गइल सेंत I

करिया कगवा के काँव से
असवा भइल निरास II

फूलन से भौंरा रूठल
मोजर से रूठल सुगंध
फुलवारी से तितली रूठल
पतझड़ भइल अनंत I

बीच भँवर में नाव से
उठ गइल बिसवास II

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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35. देंह फागुन महीना हमार भइल बा  

हमार जहिआ से नैना दू से चार भइल बा,
हमरा भितरा आ बहरा बिहार भइल बा I

पहवा फाटल हिया में अंजोर हो गइल,
पाँख में जोस के भरमार भइल बा I

जाल बंधन के तहस नहस हो गइल,
सँउसे धरती आ अम्बर हमार भइल बा I

पूस के दिन बीतल बसंत आ गइल,
देंह फागुन महीना हमार भइल बा I

महुआ फुलाइल आम मोजरा गइल,
हमरा दिल में नसा बरियार भइल बा I


डॉहरेश्वर राय
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34. आँख में रात बहुते सयान हो गइल

आँख में रात बहुते सयान हो गइल
हमार असरे में जिनिगी जिआन हो गइल I

दिल के दरिया में दर्दे के पानी रहल 
देंह जइसे कि भुतहा मकान हो गइल I

आस के डोर टूटल कटल भाईजी
आइल सपनों त अचके बिहान हो गइल I

हमरा होंठ के बगानी में फूल ना खिलल
मन क चउरा क तुलसी झंवान हो गइल I

संउसे जिनिगी कटल उनकर रहिये तकत
मौत के राह बहुते आसान हो गइल I

डॉहरेश्वर राय
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33. जीय हो जीय ढाठा

जीय हो जीय ढाठा
साठा में बनल रह बाईस के पाठा
जीय हो जीय ढाठा I

तोहके खियाइब मलीदा मलाई
बोतल के बोतल पियाइब दवाई
भुअरी के घीव से बनाइब फराठा  
जीय हो जीय ढाठा I

तहरा के नयका पोशाक सियवाइब
महँगा मोबाइल जियो के किनवाइब
जूता पेन्हाइब तोहके नाइकी आ बाटा
जीय हो जीय ढाठा I

आन्ही आ पानी से तोहके बचाइब
फुलवा के सेजिया प तोहके सुताइब
एह जिनिगी के रही तहरा नावे बीसो काठा
जीय हो जीय ढाठा I

तहरा के तनिको उरेब केहु बोली
 खाई हरेश्वर के सीना में गोली
उनुकर कुटाई जाई चौके प लाटा
जीय हो जीय ढाठा I

डॉहरेश्वर राय
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32. काहे मारेल मुसुकिया तू अइसन जनमार

काहे मारेल मुसुकिया तू अइसन जनमार
कइल हियरा में हमरा दरारे-दरार I

मिलब त तोहके बताइब संघतिया
मुंहवा में तहरा लगाइब भभूतिया
तहरा मुस्की मिसाइल से होई तकरार I

दोसरा के देखि के तूं काहे मुसुकइल
वादा कइलका तूं काहे ना निभइल
दिलफेंक बनल छुटी तहार एही एतवार I

आव लवटि के तूं बउवा हरेसर
दिहब छोड़ाई तहार बनल परफेसर
तहरा मुस्की प बाटे हमार एकाधिकार I

डॉहरेश्वर राय
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31. अजबे खेल खेलावे जिनिगिया

अजबे खेल खेलावे जिनिगिया
अजबे खेल खेलावे I

आपन कबो पराया होले
कबो पराया आपन,
कबो गले में फूल के माला
कबो गले में नागन,
कबो हँसावे कबो रोवावे
कबो-कबो सुसुकावे जिनिगिया
अजबे खेल खेलावे I

कबो चढ़ावे सिकहर ऊपर
कबो उतारे पानी,
कबहूँ मिले महल अटारी
कबहूँ चुअत छानी,
कबो तपावे कबो काँपावे 
कबो-कबो सिहरावे जिनिगिया
अजबे खेल खेलावे I

कबहूँ बेटा कबहूँ नाती
कबहूँ बाप बनावे,
कबहूँ छप्पन भोग खिआवे
कबहूँ नून चटावे,
कबो मुआवे कबो जिआवे
कबो-कबो तड़पावे जिनिगिया
अजबे खेल खेलावे I

कबो लड़कपन कबो बुढ़ापा
कबहूँ चढ़त जवानी,
सर प कबहूँ दूध ढरेला
कबहूँ ढाबर पानी,
कबो उठावे कबो गिरावे
कबो-कबो घिंसिआवे  जिनिगिया
अजबे खेल खेलावे I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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30. कहाँ गइल बचपन के गाँव

इ कइसन पचपन के गाँव
कहाँ गइल बचपन के गाँव I

मधुमास के कोयल रानी
सुखिया दादी बड़की नानी
माई के आँचल के छाँव
कहाँ गइल बचपन के गाँव I

खट्टा-मिट्ठा आम टिकोरा
बूँट-मटर के सोन्हा होरा
छान्ही प के कौआ काँव
कहाँ गइल बचपन के गाँव I

साँझी के आल्हा के तान
सगी सरौती मीठा पान
मितान के संग लट्टू दाँव
कहाँ गइल बचपन के गाँव I

होरी चैती कजरी रानी
गुड़ के भेली लोटा पानी
नीम बरगद पीपल के छाँव
कहाँ गइल बचपन के गाँव I 

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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29. अँखियन के आकाश सूना हो गइल

 अँखियन के आकाश
सूना हो गइल I

सब तारा भइलन स खेत
सपना सब भइलन स रेत,
पंखियन के परिहास
चूना हो गइल I

खेतवन प पाला पड़ल
पेटवन प भाला गड़ल,
ख़ुशीयन के बनवास
दूना हो गइल I

बंसवारी के शामत आइल
फुलवारी प आफत आइल,
कलियन के खरवांस
चौगुना हो गइल I

फेंड़ छोड़ के भगले तोंता
उजड़ गइल बा उनकर खोंता,
डलियन के संत्रास
सौगुना हो गइल I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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28. सुन्दर भोर

अम्बर के कोरा कागज़ प
ललका रंग छिंटाइल बा,
सोना रंग सियाही से
सुन्दर भोर लिखाइल बा I

नीड़ बसेरन के कलरव के
सगरो तान छेड़ाइल बा,
अन्धकार के कबर के ऊपर
आस उजास रेंड़ाइल बा I

मंद पवन मकरंद बनल बा
नीलकमल मुसुकाइल बा,
मोती रूप ओस धइले बा
गुलमोहर सरमाइल बा I

भानु बाल पतंग बनल बा
तितली दल इतराइल बा,
कोयल, संत, सरोज, बटोही
सबके मन अगराइल बा I 

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com

27. तू सुन्दर बिहान लागेलू

तोहके सुन्दर बनवले भगवान
पूनम के तू चान लागेल I
रंग देहियाँ के सोना समान
तू सुन्दर बिहान लागेलू II

सेउआ सरीखा कपोल लाले-लाले
सुन्दर मस्त नयन मतवाले I
ओठवा तहार रसखान
तू मेनका समान लागेलू II

खीरा के बिया सरीखा दांत पाँती
गरवा तहार बा सुराही के भाँती I
मीठ बोलिया लवाही समान
खुदा के बरदान लागेलू II

तहरा के देखी भँवरा बउराला
सुन्दर फूल समझि मेंड़राला I
झूठ जायसी के नायिका बखान
बसंत के उठान लागेलू II

तहरा से बाटे एकहि हथजोरिया
बउवा हरेश्वर प फेरि द नजरिया I
कइ द जीवन के पुर अरमान
तू देबीजी महान लागेलू II


डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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26. उरुआ बन्दना

सुन लीं अरजिया हमार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

जोड़िला हाँथवा गोड़वा परिला
भजिला दाँत चिहार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

मोहक चोंच नयन अभिरामा
रतिया के रउरा सरदार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

रउवे हमार साँढू रउवे हमार मउसा
सरहज के रउवे भतार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

अबकी दिवलिया प दीं दरशनवा
बोतल संगे करब इंतजार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

रात अढ़ाई बजे माई लेके आइब
माल गिराइब छपर फार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

बउवा हरेश्वरजी के अंतिम अरज बा
मारीं पडोसी के भिथार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

डॉ. हरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जी. महाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतनाम.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com

 25. आइ हो दादा
सपना देखनीं भोरहरिया
आइ हो दादा,
मुखिया हो गइल मोर मेहरिया
आइ हो दादा I

हमरा दुअरा उमड़ रहल बा
सउँसे गाँव जवार,
लाग रहल बा देवीजी के
नारा बारम्बार,
डीजे बाजता दुअरिया
आइ हो दादा I

ढोल नगाड़ा बाजे लागल
जुलुस निकलल भारी,
आगे आगे नवका मुखिया
पीछे से नर नारी,
बड़ुए मध  दुपहरिया
आइ हो दादा I

चौकठ-चौकठ घूमे लगली
नवा नवा के सीस,
बड़ बुढ़न से माँगत गइली
अपना के आसीस,
गोड़ प ध ध के अंचरिया
आइ हो दादा I

उनकर पीए हो गइनी हम
दून भइल मोर सान,
आगा पाछा घुमत बानी
सुबह से लेके साम,
छोड़ के खेत आ बधरिया
आइ हो दादा I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com

24. लूटीं लूट मचल बा

लूटीं लूट मचल बा सगरो
लूटीं लूट मचल बा I

बाढ़ लूटीं, सूखा लूटीं
राहत के लूटीं मिठाई,
 भूख लूटीं, पियास लूटीं
लूटीं थोड़की महंगाई I

वोट लूटीं, नोट लूटीं
लूटीं चकाचक नारा,
रैली लूटीं, रैला लूटीं
गटकीं देशी ठर्रा I

राज लूटीं, लाज लूटीं
लूटीं तनिका मह्मारी,
जात लूटीं, पाँत लूटीं
लूटीं मौत बीमारी I 

दिल्ली लूटीं, पटना लूटीं
लूटीं छपरा आरा,
गोर लूटीं, करिया लूटीं
लूटीं दखिन दियारा I

पगड़ी, चूड़ी, साड़ी लूटीं
लूटीं गुलाबी वादा,
लूटीं सभे लूट मचल बा
नर होखीं भा मादा I

डॉहरेश्वर राय
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23. नेह भरल पाती
नेह भरल पाती
अब ना आवे 

ऊंघाअइल माई के लोरी
गूंग भइल चैती  होरी 

सुखिया दादी पराती
अब ना गावे  

दरक गइल आंगन के छाती
चूल्हा फोरि बँटाईल माटी 

पुरनियाँ के थाती
अब ना भावे 

डॉहरेश्वर राय
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22. सुन्दर खेत बनाइब हम 
गमछी भर लेके आकाश
सुन्दर खेत बनाइब हम,
एक कटोरा तारा-बिया
ले ओहमें फैलाइब हम I

बियन के अंकुरावे खातिर
मुट्ठी भर बदरी ले आइब,
पौधन के उपजावे खातिर
दिया भर सुरुज छींटवाइबI

तारन से जब खेत भरी त
नाचब कुदब गाइब हम,
दूज चान के हँसुआ लेके
कटवाइब बन्ह्वाइब हम I

तारा के बोझन से भरब
गाँवन के खलिहान
ताव देत मोंछ्न प घुमिहें
देशवा के किसान I

डॉहरेश्वर राय
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21. मन उदास बा
सुक्खल नदी जस
मन उदास बा I

चाँद जस आस में
लागल बा गरहन,
सपना के पाँखी प
घाव भइल बड़हन,

डेगे डेग पसरल
खाली पियास बा I

आँखी के बागी में
पतझड़ के राज बा,
मन के मुंडेरा प
गिर रहल गाज बा,

उदासी के गरल से
भरल गिलास बा I

हँसी के फूल प
उगल बा शूल
ख़ुशी के खेत में
उगल बबूल,

जिनिगी सरोवर के
घाट बदहवास बा I

डॉहरेश्वर राय
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20. आवले बोलता नयका बिहान
हर के कलम से
धरती के कागज प
पसीना के सियाही से
जीवन उकेरे ला किसान
बाकिर ओकरे घटल रहता
चाउर पिसान !

ओकरे पसीना
अतना सस्ता काहे बा
ओकरे हालत
अतना खस्ता काहे बा
सवाल प सवाल
पूछता किसान ?

चुप्पी टूटल बा
त बुढ़िया आन्ही अइबे करी
ताश के पत्ता से बनल
ताज तखत उड़इबे करी
आ अन्हरिया के होई
सम्पुरने भसान I

उगिहें सुरुज
पुरुबवाके ओर
झाँकी किरिनिया
अंगनवा के ओर
बदलल बा मिजाज मौसम के
 आवले बोलता नयका बिहान I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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19. दीप
घोर अमावस के पूनम में
बदल रहल बा दीप,
मद में आन्हर अन्धकार के
मसल रहल बा दीप I

कठिन दौर से गुजर-गुजर के
निकल रहल बा दीप,
गिर रहल बा, उठ रहल बा
संभल रहल बा दीप I

आन्ही पानी में भी हरदम
टिकल रहल बा दीप,
भय, निराशा, निर्बलता के
निगल रहल बा दीप I

मन में लेके आस भोर के
मचल रहल बा दीप,
हरेक बार अपना मिशन में
सफल रहल बा दीप I

डॉहरेश्वर राय
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18. गजब-गजब के गुल
गगन बाग़ में खिल रहल बा
सितारन  के फूल,
भुईंया ऊपर उग रहल बा
जटही अउर बबूल I

माड़-भात प गरहन लागल
कोंहड़ा फूल किराइल बा,
कोदो सावाँ मडुआजी के
दिन बहुत पतराइल बा I

गधपुरना के सामत आइल
नोनी करमी गइल सुखाय,
दिन फिरल गोबरछत्ता के
गाजर घास बहुत अगराय I

गजब गति से पनप रहल बा
बेशरम के कुल
कुक्कुरमुत्ता खिला रहल बा
गजब गजब के गुल I
डॉहरेश्वर राय
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17. उरुआ बन्दना
सुन लीं अरजिया हमार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

जोड़िला हाँथवा गोड़वा परिला
भजिला दाँत चिहार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

मोहक चोंच नयन अभिरामा
रतिया के रउरा सरदार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

रउवे हमार साँढू रउवे हमार मउसा
सरहज के रउवे भतार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

अबकी दिवलिया प दीं दरशनवा
बोतल संगे करब इंतजार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

रात अढ़ाई बजे माई लेके आइब
माल गिराइब छपर फार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I

बउवा हरेश्वरजी के अंतिम अरज बा
मारीं पडोसी के भिथार, उलुकदेव
सुन लीं अरजिया हमार I
  
डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिशशासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
पत्राचार का पताः पांचजन्यबी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतनामध्यप्रदेश 485001
फोन न.- 09425887079, ईमेलroyhareshwarroy@gmail.com
16. रउआ बिटियन प खूबी इतराईं भाईजी
रउआ बिटियन के खूबहिं पढ़ाईं भाईजी
रउआ बिटियन के खूबहिं लिखाईं भाईजी।

भेदभाव के भूत भगाईं प्रेम के जोत जलाईं
नेह-छोह के खाद डालके सुन्दर फूल खिलाईं,
रउआ बिटियन के बेनिया डोलाईं भाईजी
रउआ बिटियन के झुलुआ झुलाईं भाईजी ।

तनिका सा ढीली छोड़ब त धइ ली इ आकास 
चाँद सुरुज जइसन फैलाई दुनियाँ में परकास,
रउआ बिटियन के खूबहिं हँसाईं भाईजी
रउआ बिटियन के खूबहिं खेलाईं भाईजी ।

घर के बन दरवाजा खोलीं खुला समर में लड़े दीं
ऊँचा से ऊँचा परवत प छोड़ीं ओहके चढ़े दीं,
रउआ बिटियन के खूबहिं लड़ाईं भाईजी
रउआ बिटियन के खूबहिं बढ़ाईं भाईजी ।

एक हाथ में पेन धराईं दूजे में तलवार
नाया नाया गीत रचे दीं भरे दीं हुंकार,
रउआ बिटियन के निरभय बनाईं भाईजी
रउआ बिटियन प खूबी इतराईं भाईजी ।

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
15. भजो रे मन हरे हरे
नियरे बा फेन से चुनाव
भजो रे मन हरे हरे 
कौअन के होइ काँव काँव
भजो रे मन हरे हरे 

पाँच साल पर साजन अइहें
गेंदा फूल गले लटकैहें।
चारु ओरे होइ तनाव
भजो रे मन हरे हरे 

हाँथ जोरि के मुँह बनइहें
आपन पनही अपने खइहें।
चलिहें गजब के दाव
भजो रे मन हरे हरे 

मुँह उठवले भटकत मिलिहें
हर दर माथा पटकत मिलिहें 
छुअत चलिहें मुँह पाँव
भजो रे मन हरे हरे 

बालम वादा बाँटत फिरिहें
थूकत फिरिहें चाटत फिरिहें 
पउआ बँटाई हर गाँव
भजो रे मन हरे हरे 

जीतिहें जइहें फेर ना अइहें
लुटिहें कुटिहें पिहें खइहें।
पूछिहें कब्बो ना नाँव गाँव
भजो रे मन हरे हरे 

होखल जरूरी बा इनकर दवाई
एहिमें बड़ुए सभकर भलाई 
दिहल जरुरी बा घाव
भजो रे मन हरे हरे 

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिशशासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
पत्राचार का पताः पांचजन्यबी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतनामध्यप्रदेश 485001
फोन न.- 09425887079, ईमेलroyhareshwarroy@gmail.com
14. बेटी बिना जियल अपमान लागेला 
जइसे चंदा बिना सून आसमान लागेला
ओइसे बेटी बिना जीवन सुनसान लागेला ।

बेटी देबीबेटी दुरगाबेटी कालीमाई
मीरा सीता गीता बेटी बेटी लछमीबाई,
जइसे गुड़ बिना फीका पकवान लागेला
ओइसे बेटी बिना आगन समसान लागेला ।

पूजा के थाली ह बेटी बेटी तीरथ धाम
नदिया के पानी ह बेटी बेटी ह बरदान,
जइसे आदित बिना बसिहा बिहान लागेला
ओइसे बेटी बिना दुनियाँ जहान लागेला ।

सावन बेटी पावन बेटी बेटी रितु बसंत
तितली कोयल मैना बेटी आशा-खुशी अनंत,
जइसे गोरेया बिन बधारी के सिवान लागेला
ओइसे बेटी बिन मतारी के मकान लागेला ।

बिटिया के बिना इ दुनियाँ हो जइहें बिरान
इनकर देखि उपेक्षा लोगे खिसिअइहें भगवान,
जइसे उपज बिना खेत खरिहान लागेला
ओइसे बेटी बिना जियल अपमान लागेला ।

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
13. गलकल रीत
गाईं कइसे
अँटकल गीत.

सून दुआरा
अंगना सून
मन में पइठल
पसरल जून

कर से हमरा
सरकल जीत.

धवरा सोकना
ठाढ़ उदास
भुअरी के
उखड़ल बा सांस

चलनी छानी
दरकल भीत.

बचवा बम्बे
दिल्ली बचिया
हमरा संग
चितकबरी बछिया

इहे आज के
गलकल रीत.
  
डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
12. का का सियाईं
आँखिन के अम्बर मेंबाझ मेड़राता 
छातिन के धरती रेगनी फुलाता  

गऊआं के पाकड़ बइठल बा गीध 
मुसकिल मनावल बाहोली  ईद  

खेतन में एह सालफुटि गइल भुआ 
सहुआ दुअरिये बइठल बा मुआ 

अदहन के पानी मेंजहर घोराइल बा 
साँस लेल मुसकिल बाहावा ओराइल बा 

जीवन के डेंगी मेंभइल बा भकन्दर 
लागता कि डूबी बीचे समन्दर 

चूर भइल सपनाभाग भइल घूर 
रोपतानी आम उगता बबूर 

मू गइले बाबूजीभइल ना दवाई 
माई के पिनसिन होता लड़ाई 

बुचिया के आँखि मेंमाड़ा फुलाइल बा 
मेहरि के ठेहुन केतेल ओरियाइल बा 
बउआ हरेसवर जीका का बताईं।
चारु ओरे फाटल बा का का सियाईं॥

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
11. कइसे मनावल जाई फगुआ देवारी
रोवतारे बाबू माई
पुका फारि फारी,
बए  के कीन लेहलस
पपुआ सफारी I

साल भर के खरची बरची
कहवाँ से आई,
चाउर चबेनी के
कइसे कुटाई,
कइसे लगावल जाई  
खिड़की केवारी I

छठ एतवार कुल्ही
फाका परि जाई, 
बुचिया के कहवाँ से
तिजीया भेजाई,
कइसे मनावल जाई  
फगुआ देवारी I

रांची बोकारो घूमी
घूमि गाँवाँ गाँईं,
ललकी पगरिया बान्ही
भाईजी कहाई,
लफुअन से मिले खातिर
जाई माराफारी I

चिकन मटन के संगे
दारू खूब घोंकी,
पी के पगलाई त
कुकुर जस भोंकी,
कुरुता फरौवल करी
लड़ी फौजदारी I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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10. आस के पात
मन ठूंठ पर  
आस के पात  आइल 

जेठ माह के तपन सेराइल
सावन के आइल पुरवाई
तन अगस्त के फूल भइल
हर गोड़न से गइल बेवाई 

बगिया के
गइल तोता हाथ आइल

मन पुरइन के पात भइल
जोन्ही भइल तन्हाई
ओठ फ़ाग के गीत भइल
आँखि भइल  अमराई  

नवनीत से 
नहाइल रात आइल 

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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9. अइसन करिह जनि नादानी
गउआँ छोड़ि शहर जनि जइह
होइ ख़तम निशानी
जवानी खपि जाइ बचवा,
अइसन करिह जनि नादानी
जवानी खपि जाइ बचवा I

खेत छुटि खरिहान छुटि
 छूटिहें बाबू माई,
अंगना दुअरा सब छुटि जइहें
छूटिहें छोटका भाई,
फूट-फूट के रोइब बबुआ
हो जइब बेपानी
जवानी खपि जाइ बचवा I

गली गली मीरजाफर ओहिजा
चउक चउक जयचंद,
टूँड़ उठवले बिच्छी मिलिहें
फू फू करत भुजंग,
चउबीस घंटा होइ पेराई
होइ कमर कमानी
जवानी खपि जाइ बचवा I

लटपटियन के फेरा में तू
बबुआ जब परि जइब,
दिने तरेगन लउके लागी
ओका जस मुँह बइब,
बाप बाप चिचियइब बाकिर
केहुओ ना पहचानी
जवानी खपि जाइ बचवा I

बासी बासी भोर मिली
अरूआइल साँझ उदास,
पाँख नोचाइल चिरईं बनब
भुइँया गिरी आकाश
आन्हर गूंग बहिर होइ जइब
होइ ख़तम कहानी
जवानी खपि जाइ बचवा I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com 
8. गजबे बा इ देश
गजबे बा इ देश  रे भइया
खल खल के गीत गावेला ।

सत्य बुद्ध के कहाँ गइल
उपनिषद के शांति कहाँ गइल
राष्ट्रपिता के अहिंसा
कहाँ भगत के क्रांति गइल ।

उज्जर झक खादी के ऊपर
छलिया दाग लगावेला ।

पंचयत के चौपालन पर
पांचाली के चीर हराता
लाशन के टीला पर बइठल
भेड़िया अजब गजब मुस्काता ।

अखबारन के पन्नन  से
गंध चिराइन आवेला ।

लोकतंत्र के सुन्दर मुँह पर
घाव भइल बा भारी
चोर उचक्का राजा बनले
मेहनतकश भिखारी ।

छल परपंच करेवाला ही
एहिजा सब कुछ पावेला ।

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
7. हमार गाँव
हमर गऊआँ गजब अलबेला
उदास कभी होखे ना देला ।

ओहि मोरा गऊआँ में बलवाँ बधरिया
धानी चुनरिया में लागे बहुरिया
दोल्हा पाती ओहिजे जमेला
उदास कभी होखे ना देला ।

ओहि मोरा गऊआँ में चाना के पुलिया
मछरी फँसावे ला लागेला जलिया
ओकर पीपर त लागे झुमेला
उदास कभी होखे ना देला ।

ओहि हमर गऊआँ में जिला चउकवा
ओहिजे मिलेला सउँसे गाँव के सनेसवा
ओहिजा कुछु कुछु केहु बकेला
 उदास कभी होखे ना देला ।

ओहि मोरा गऊआँ में काली स्थनवा
रोजे रोज  होखेला उनुकर पुजनवा
उनुके किरिपा से गऊआं हँसेला
उदास कभी होखे ना देला ।

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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6. चंदा के ले आव ना
ए कोइलरी ! आव ना।
मिसिरी जस गीत सुनाव ना ॥

तरवाईल तन के उजास
मन के मिठास मरुआईल बा।
अंदर तक खालीपन पसरल
साख पाँख लरुआईल बा ।

तितली रानी ! आव ना ।
अपना संगे उड़ाव ना ॥

बाबूजी भइलन मरियाठी
माई माँस के गठरी ।
बिकी गइल भुअरी पाड़ी
बिकी गइल झबरी बकरी ।

कुतुर कुतुर के सुग्गा राजा ।
आम प आम गिराव ना ॥

पूल कठहवा टूटि गइल
उजरि गइल फुलवारी  
दिआँका चौकठ चाट गइल
खिड़की सड़ल बेचारी ।

मैना रानी ! फुदक फुदक के ।
सुन्दर नाच देखाव ना ॥

ढेंकी बिधवा हो गइल
भरकल दुअरा के कूप ।

जाँता भूखे मर रहल
बचल ना चलनी सूप।

बहक चल पुरवैया रानी ।
अंदर तक महकाव ना ॥

चिपरी बिन बा गाड़ा सुतल
मथनी गिरल हताश ।
काजर बिन कजरौटा सूना
लुढ़कल पड़ल निराश  

सुन ल मोरी साँझ पियारी।
चंदा के ले आव ना ॥

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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5. गजब हो गइल
माई घरे तोरा कहयिनी
सासु घरे रउरा
गजब हो गइल
भइनी गउरी से गउरा
गजब हो गइल।

कनियाँ बनके ससुरा अइनी
सासु खूब खिअवली
पुहुट बनावे खातिर हमके
खुबे दूध पियवली
देखते देखत हो गइनी हम
गरइ से सउरा
गजब हो गइल।

चूल्हा मिलल चउका मिलल
मिलल चाभी ताला
रिन करज के बोझा मिलल
मिलल छान्ही के जाला
कुछे दिन में हो गइनी हम
कठेला से मऊरा
गजब हो गइल।

मुँह सुखाइल बार झुराइल
आँख कान बेराम
एह जिनिगी के गजब खेल बा
समझ ना आइल राम
समय बनवलस हमके भइया
दउरी से दउरा
गजब हो गइल। 

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
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4. रंगदार हो गइल
रंगदार हो गइल
मोरा गाँव के लल्लू I

ठेलठाल के इंटर कइलस
बीए हो गइल फेल,
रमकलिया के रेप केस में
भोगलस कुछ दिन जेल,

असरदार हो गइल
मोरा गाँव के लल्लू I

खादी के कुरूता पयजामा
माथे पगड़ी लाल,
मुँह में पान गिलौरी दबले
चले गजब के चाल,

ठेकेदार हो गइल
मोरा गाँव के लल्लू I

पंचायत चुनाव में
कइलस नव परपंच,
समरसता में आग लगवलस 
चुनल गइल सरपंच,

सरकार हो गइल
मोरा गाँव के लल्लू I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
3. चलीं अपना गाँव
चलीं अपना गाँव
तनि सा घूम आईं I

पत्थल के एह नगरिया में
पथरा गइलीसन आँख,
टुटल डाढ़ी अस गिरल बानी
कटल परल मोर पाँख,


लागल बा चोट कुठाँव
त कइसे धूम मचाईं I

खिसियाइल दुपहरिया में
तिल तिल के तन जरता,
नोनिआइल देवालिन में
नोनी जस मन झरता,

ओहिजे मिली नीम छाँव
तनिसा  झूम आईं I

छाँह नदारद ठाँह नदारद
माहुर उगलत नल,
का जाने कइसन बा आपन
आवेवाला कल,

दादी अम्मा के पाँव
तनि सा चूम आईं  I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
2. कमाइ दिहलस पपुआ

पढ़ि लिखि के का कइल
भईया पढ़वईया,
कमाइ दिहलस पपुआ
खाँचा भर रुपईया I

मंत्री बिधायकजी के
खास भइल बड़ुए,
गऊआँ के लफुअन के
बॉस भइल बड़ुए,
आ मुखियाजी के काँख के
भइल बा अँठईया I

मुंशी पटवारीजी के
करेला दलाली,
मुँहवा में पान लेके
करेला जुगाली,
आ भोरहिं से लाग जाला
फाँसे में चिरईयाँ I

हिंदी-अंगरेजी
भोजपुरी बोलि लेला,
बनब त बन हरेसर
ओकर पकवा चेला,
पढ़ल लिखल छोड़छाड़ के
बन जा पप्पू भईया I

डॉहरेश्वर राय
प्रोफेसर ऑफ़ इंग्लिश शासकीय पी.जीमहाविद्यालय सतनामध्यप्रदेश
बी-37, सिटी होम्स कालोनीजवाहरनगर सतना.प्र., 09425887079, royhareshwarroy@gmail.com
1. हमार जान ह भोजपुरी
हमार शान ह
हमार पहचान ह भोजपुरी,
हमार मतारी ह
हमार जान ह भोजपुरी I

इहे ह खेतइहे खरिहान ह
इहे ह सोखाइहे सिवान ह,
हमार सुरुज ह
हमार चान ह भोजपुरी I


बचपन बुढ़ापा हह इहे जवानी
चूल्हा के आगि हअदहन के पानी,
हमार साँझ ह
हमार बिहान ह भोजपुरी I

ओढिला इहेइहे बिछाइला
कुटिला इहेइहे पिसाइला,
हमार चाउर ह
हमार पिसान ह भोजपुरी I


इहे ह धरनइहे ह छानी
हमरा पसीना के इहे कहानी,
हमार तीर ह
हमार कमान ह भोजपुरी I

कजरी ह बिरहा हइहे ह फ़ाग
इहे कबीरा ह, इहे ह घाघ,
हमार बिरासत ह
हमार ईमान ह भोजपुरी I

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