विलियम शेक्सपियर: एक महान नाटककार

विलियम शेक्सपियर: एक महान नाटककार

विलियम शेक्सपियर अंग्रेजी भाषा के महानतम लेखक हैं। साहित्य, रंगमंच और यहाँ तक कि हमारी रोज़मर्रा की बोलचाल पर उनका प्रभाव बहुत गहरा है। वे एलिज़ाबेथ काल से संबंधित हैं। उन्होंने लगभग 37 से 39 नाटकों की रचना की है। उनके नाटक भावनाओं और संघर्षों की गहराई में उतरते हैं। प्रेम, हानि, महत्वाकांक्षा, विश्वासघात, शक्ति और मुक्ति उनके नाटकों के प्रमुख विषय हैं। सार्वभौमिक मानवीय अनुभव को अभिव्यक्त करने की उनकी अद्वितीय क्षमता ही उन्हें महान बनाती है।
शेक्सपियर का जन्म अप्रैल 1564 में इंग्लैंड के स्ट्रैटफ़ोर्ड-अपॉन-एवन में हुआ था। वे जॉन और मैरी शेक्सपियर की सबसे बड़ी संतान थे। उनकी पत्नी का नाम ऐनी हैथवे था। उनकी तीन संतानें थीं जिनका नाम सुज़ाना, हैमनेट और जूडिथ था। शेक्सपियर लंदन चले गए और एक अभिनेता और नाटककार के रूप में काम किया। लंदन में वे लॉर्ड चेम्बरलेन्स मेन (बाद में किंग्स मेन) नामक एक बहुत प्रसिद्ध अभिनय कंपनी में शामिल हो गए। उन्होंने कड़ी मेहनत की और उनका करियर फला-फूला। उन्होंने अनगिनत रचनाएँ कीं। 1616 में उनका निधन हो गया और वे अपने पीछे एक ऐसी विरासत छोड़ गए जो सचमुच अमर है।
शेक्सपियर के प्रमुख दु:खांत नाटकों में हेमलेट, किंग लियर, मैकबेथ, ओथेलो और रोमियो एंड जूलियट शामिल हैं। उनके अन्य दु:खांत नाटक हैं: एंटनी एंड क्लियोपेट्रा, कोरिओलेनस, सिम्बेलाइन, टाइटस एंड्रोनिकस, ट्रॉयलस एंड क्रेसिडा और द लाइफ ऑफ टिमन ऑफ एथेंस। उनकी प्रमुख हास्य कृतियाँ हैं: ए मिडसमर नाइट्स ड्रीम, ऐज़ यू लाइक इट, मच अडो अबाउट नथिंग, ट्वेल्थ नाइट, द मर्चेंट ऑफ वेनिस, द टैमिंग ऑफ द श्रू और द कॉमेडी ऑफ एरर्स। शेक्सपियर के लोकप्रिय रोमन नाटक हैं: कोरिओलेनस, जूलियस सीज़र, एंटनी एंड क्लियोपेट्रा और टाइटस एंड्रोनिकस। शेक्सपियर के प्रमुख ऐतिहासिक नाटक हैं: हेनरी चतुर्थ, हेनरी पंचम, हेनरी षष्ठम, हेनरी अष्टम, रिचर्ड द्वितीय, रिचर्ड तृतीय और किंग जॉन।
शेक्सपियर के दु:खांत नाटक अक्सर एक वीर नायक के पतन का वर्णन करते हैं। ये हमें भाग्य, नैतिकता और मानवीय कार्यों के परिणामों से जुड़े गहन प्रश्नों से रूबरू कराते हैं। ये आमतौर पर दुःख या मृत्यु के साथ समाप्त होते हैं। ये सिर्फ़ दुखद कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि ये मानवीय मानस में गहरे उतरते हैं।
शेक्सपियर के हास्य नाटकों की विशेषताएँ गलत पहचान, चतुराईपूर्ण शब्दों का खेल, जटिल कथानक और सबसे महत्वपूर्ण, सुखद समाधान हैं। ये नाटक अक्सर विवाह के साथ समाप्त होते हैं। ये अक्सर जीवन, प्रेम और सामाजिक मानदंडों पर एक हास्यपूर्ण नज़र डालते हैं।
शेक्सपियर की जटिल और बहुआयामी पात्रों की रचना करने की क्षमता प्रशंसनीय है। उनके पात्र केवल कथानक के उपकरण नहीं हैं। अपनी खूबियों, कमज़ोरियों, शंकाओं और इच्छाओं के साथ, वे वास्तविक प्रतीत होते हैं। पीड़ित राजकुमार हेमलेट से लेकर चालाक लेडी मैकबेथ तक, प्रत्येक पात्र को बड़ी बारीकी से गढ़ा गया है।
शेक्सपियर के कथानक अपनी जटिलता, रहस्य और नाटकीय मोड़ के लिए प्रसिद्ध हैं। वह कई कथानकों को कुशलता से एक साथ बुनते हैं। वह अक्सर गलत पहचान और छुपकर सुनने जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। पात्रों के आंतरिक विचारों को प्रकट करने और कथा को आगे बढ़ाने के लिए शेक्सपियर एक शक्तिशाली नाटकीय उपकरण, एकालाप, का प्रयोग करते हैं। शेक्सपियर के नाटक कभी उबाऊ नहीं होते। वे एक लय के साथ चलते हैं जो तनाव पैदा करती है और संतोषजनक निष्कर्ष देती है।
शेक्सपियर की भाषा उनकी प्रतिभा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने अधिकांशतः रिक्त पद्य में लिखा है। यह उनके संवादों को एक स्वाभाविक लय प्रदान करता है। उन्होंने एक विशाल शब्दावली का भी प्रयोग किया है। वह शब्दों के साथ खेलते हैं। उन्होंने यादगार रूपकों और उपमाओं की रचना की है। उनके कई मुहावरे जैसे 'होना या न होना', 'अंत भला तो सब भला', या 'बर्फ तोड़ना' आज भी प्रचलित हैं।
अंततः यह कहना उचित होगा कि विलियम शेक्सपियर मानवीय परिस्थितियों के गहन प्रेक्षक हैं। उनकी रचनाएँ भावनाओं, दर्शन और शानदार कहानी कहने की कला का एक समृद्ध ताना-बाना हैं। उनके नाटक आज भी उतने ही ताज़ा और प्रासंगिक हैं जितने कि एलिज़ाबेथ के समय में इंग्लैंड में थे।
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